चालाक बंदर और मगरमच्छ | Hindi Story with Moral

यहां पर एक चालाक बंदर और मगरमच्छ की कहानी (Hindi Story with Moral) शेयर की गई है। यह बहुत ही मनोरंजक और प्रेरणादायक Hindi story है। जिसे पढ़ने के बाद आप को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा इसलिए इस कहानी को पूरा जरूर पढ़ें।

चालाक बंदर और मगरमच्छ – Hindi Story with Moral

चालाक बंदर और मगरमच्छ – Hindi Story with Moral
चालाक बंदर और मगरमच्छ – Hindi Story with Moral

एक ऊंचे पहाड़ी पर एक खतरनाक झील थी। वहाँ दिन भर तो कोई घटना नहीं होती पर थोड़ा सा भी अंधेरा छाते ही वह झील खूनी झील बन जाती थी। उस दौरान जो भी जानवर उस झील पर पानी पीने जाता वह जिंदा वापस नहीं आता। लेकिन आज तक किसी को उसका पता नहीं चला था कि ऐसा क्यों होता है। यही वजह थी कि जंगल के सारे जानवरों ने यहाँ तक की जंगल के राजा शेर ने भी उस झील को खूनी झील घोषित कर दिया था। अब पूरे जंगल में कोई भी शाम को उस झील की तरफ जाने की हिम्मत नहीं करता था।

1 दिन उस जंगल में एक बंदर आ जाता है, उसकी और खरगोश की मुलाकात होती है। खरगोश ने पूछा – बन्दर भाई कौन हो तुम पहले तो कभी इस जंगल में तुम्हें नहीं देखा। बंदर ने कहा – मैं शहर में इंसानों के बीच चिड़ियाघर में था किसी तरह आजाद हो कर यहाँ आ पाया हूँ। क्या इस जंगल में मेरे रहने के लिए जगह है। हाँ बन्दरभाई ये जंगल हम जैसे जानवरों का घर है इंसानों का चिड़ियाघर नहीं आओ मैं तुम्हें पूरे जंगल की सैर करवाता हूँ। सारी जगह के बारे में बताता हूँ जो जगह पसंद आए वही टिक जाना और खरगोश बंदर को पूरा जंगल घुमाता है हाथी जीराफ जैसे कई जानवरों के रहने की जगह ही नहीं वहाँ के राजा शेर की गुफा दिखाता है। परन्तु खूनी झील के बारे में ना बताता है और ना उसे वो दिखाने ले जाता है।

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बंदर वही के बरगद के एक बड़े से पेड़ को अपने रहने के लिए पसंद कर लेता है। वहाँ रहते हुए अभी उसे 2 दिन ही गुजरते हैं। तीसरे दिन शाम को बंदर घूमते हुए उसी झील के पास पहुँच जाता है। और कहता है कि कितनी सुंदर झील है। मन तो चाहता है कि ठंडे-ठंडे पानी में नहा लूं पर सर्दी हो जाने का खतरा है, चलो कोई नहीं ठंडा पानी पीकर प्यास ही बुझा लेता हूँ। जैसे ही वह पानी पीने लगता है झील के अंदर से एक बड़ा सा मगरमच्छ निकलता है और बंदर को खाने झपटता है।

बंदर तुरंत ही पीछे हट जाता है और वहाँ से भाग जाता है। बंदर को भागते हुए देख कर हिरण बोला बन्दर भाई इस तरह घबराए हुए से कहाँ से आ रहे हो बंदर ने बताया कि झील के किनारे पानी पीने गया था। इस पर हिरण ने कहाँ बंदर भाई तुम झील के किनारे गए थे और वहाँ से जिंदा वापस आ गए तुम्हें पता नहीं वो इस जंगल की खूनी झील है। शाम होने पर कोई भी वहाँ जाता है तो जिंदा वापस नहीं आता उसकी लाश का भी पता नहीं चलता कहाँ गायब हो जाती है। इसलिए शाम होते ही कोई भी उस झील की तरफ़ नहीं जाता। ये हमारे शेर राजा का आदेश भी है।

लो खरगोशभाई भी आ गए खरगोशभाई आपकी वजह से आज बन्दरभाई की जान जाते-जाते बची मेरी वजह से हाँ तुमने बन्दरभाई को पूरा जंगल घुमाया हर जगह के बारे में बताया पर इस खूनी झील के बारे में क्यों नहीं बताया? खरगोश ने कहा मैं भूल गया था। पर क्या हुआ अरे अभी अभी इन्हें खूनी झील के खूनी ने पकड़ने की कोशिश की ये तो बाल-बाल बच गए वरना बंदर भाई की जान चली जाती।

खरगोश बोला- खूनी झील के खूनी क्या तुमने उस खूनी को देखा है? बंदर बोला हाँ। क्या तुम लोगों ने आज तक नहीं देखा। नहीं हम मे से कोई कभी भी शाम को उस तरफ जाता ही नहीं और दिन में कोई भी घटना नहीं होती। और ये सब बात वो जाकर शेर राजा को बताते हैं। उसकी बात सुनकर किसी को भी यकीन नहीं आता है। क्या बात कर रहे हो बन्दरभाई हमने तो आज तक देखा ही नहीं उस खूनी को।

इस पर बंदर ने कहा क्योंकि आप लोग उसे खूनी झील समझकर दिन में ही वहाँ जाते हो शाम होते ही आप लोग डर के मारे वहाँ जाना बंद कर दिया है। पूरे दिन मगरमच्छ झील में छिपा रहता है और शाम होते ही चुपचाप निकलता है और झील के पास पानी पीने आए जानवरों को खा जाता हैं। और सब समझते हैं की ये झील ही खूनी है। जबकि खूनी ये झील नहीं इसमें छुपा हुआ मगरमच्छ है। सब बोले हमें यकीन नहीं हो रहा है। अगर तुम्हारी बात सच है तो क्या तुम हमें उसे दिखा सकते हो? क्यों नहीं आप लोग वहाँ आकर पेड़ों पत्थरों के पीछे छिप जाना।

शाम को ही सभी उस खूनी झील के किनारे जाकर छिप जाते है बन्दर खूनी झील के किनारे जाकर दो तीन बड़े बड़े पत्थर फेकता है। छपक छपक की आवाज़ आती सुनकर मगरमच्छ चुपचाप पानी के अंदर चलता हुआ शिकार करने वहाँ आता है। यह सब देखकर सब चौक जाते हैं।

अब सभी को बंदर की बात पर भरोसा हो जाता है। सभी शेर राजा के गुफा में मीटिंग करते हैं ये मगरमच्छ जरूर कही से हमारी झील में आ गया है। शेर राजा बोलते हैं धरती पर होता तो दो पंजा लड़ा लेते पर पानी ने हमारी शक्ति कम हो जाती है। इस पर बंदर भाई बोला बस मुझे दो बड़ी बड़ी रस्सी दें दो मैं इसे काबू कर सकता हूँ। रस्सी का क्या करोगे? शहर के चिड़ियाघर में था तो मैंने वहाँ एक से एक तरीके सीखे है जानवरों पर कब्जा करने के लिए इस पर कब्जा कर लेंगे और बंदर को दो बड़ी बड़ी रस्सी लाकर दी जाती है।

बंदर उन सभी के साथ रस्सी लेकर उसी खूनी झील पर पहुँचता है। और रस्सी का फंदा बनाकर पेड़ से एक छोर बांधता है और झील पर लगा देता है। और पानी पीने लगता है यह देखकर मगरमच्छ बंदर की ओर आता है और फंदे में फंस जाता है। और जितना छुटाने की कोशिश करता है उतना ही फंदा कसता जाता। पानी में इससे आगे नहीं बढ़ पाता है। सभी बोले अरे वाह यह तो अब हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा हम सभी जानवर इस पानी में दिन रात कभी भी नहा सकते हैं पानी पी सकते हैं। बन्दरभाई मान गए हैं आपको आपने तो हमारी पानी की प्रॉब्लम ही सॉल्व कर दी वरना तो रात भर हमें प्यासे रहना पड़ता था।

इस कहानी से क्या सीख मिली?

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि किसी भी जगह की अफवाह सुनकर उसे छोड़ नहीं देना चाहिए, बल्कि उस अफवाह का समाधान क्या है? वो खोजना चाहिए। क्योंकि कोई भी जगह खूनी नहीं होती उस जगह पर रहने वाला खूनी होता है।

प्यारे दोस्तों यह थी एक चालाक बंदर और मगरमच्छ की कहानी (Chaalak Bandar aur Crocodile Story in Hindi) उम्मीद करता हूँ आपको यह कहानी पसंद आई होगी। कहानी पढ़ने के लिए आपका शुक्रिया!

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FAQ

Q: बंदर कहाँ से आया था?

Ans: बंदर शहर के चिड़िया घर से भागकर जंगल में आया था।

Q: खूनी झील में कौन रहता था?

Ans: खूनी झील में एक मगरमच्छ रहता था।

Q: चालाक बंदर ने क्या किया?

Ans: चालाक बंदर ने खूनी झील में छुपे मगरमच्छ को जाल में फंसा दिया जिससे सभी जानवर रात में भी आराम से पानी पी सके।

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