आलस का परिणाम कहानी हिंदी में | Aalas ka Parinam Story in Hindi

Aalas ka Parinam Story in Hindi: आलस का परिणाम कहानी हिंदी में, आलसी व्यक्ति की कहानी में एक मगलू नाम का व्यक्ति बिना कुछ किए ही अमीर आदमी बनना चाहता है। और वह एक ऐसे अक्लमंद आदमी की खोज में निकल पड़ता हे जो उसे रातो-रात अमीर बनने का उपाय बता सके। लेकिन वब अपने आलस की बजह से बहुत बड़ी मुसीबत में पड़ जाता है। जानिए इस कहानी में क्या हुआ मगलू के साथ…

आलस का परिणाम कहानी हिंदी में (Aalas ka Parinam Story in Hindi)

आलस का परिणाम कहानी हिंदी में (Aalas ka Parinam Story in Hindi)
आलस का परिणाम कहानी हिंदी में (Aalas ka Parinam Story in Hindi)

एक बार की बात है, मगलू नाम का एक व्यक्ति था। वह बड़ा ही आलसी और निकम्मा था। वह कुछ करना ही नहीं चाहता था। हर समय बस काम से जी चुराता रहता था। इसी कारण से उसकी पत्नी और बच्चे भी कितनी ही बार भूखे रह जाते थे, लेकिन उसको कोई असर नहीं होता था।

कई बार मगलू की पत्नी उसे डांटती फटकारती थी और कोसते हुए कहा करती थी- ‘तुम बहुत ज्यादा आलसी हो गए हो! तुम कुछ काम-धन्धा क्यों नहीं करते?’

लेकिन उसके जवाब में मगलू सिर्फ इतना ही कहता था, मुझे काम करने की कोई जरूरत नहीं है। थोड़ा-सा इंतजार करो और फिर देखना कि बिना कुछ किए ही मैं एक दिन इतना अमीर आदमी बन जाऊंगा। की सब लोग दंग रह जाएंगे।

उसकी पत्नी उसे समझाते-समझाते थक गई थी कि बिना काम किए तुम कभी अमीर नहीं बन सकते।

एक रोज मगलू ने यह फैसला किया कि वह किसी अक्लमंद आदमी से मिलकर पूछेगा कि वह एक ही दिन में किस तरह अमीर बन सकता है। इसलिए वह एक ऐसे अक्लमंद व्यक्ति की तलाश में निकल पड़ा जो उसके सवाल का जवाव दे सके।

चलते-चलते रास्ते में उसे एक भेड़िया मिला। ‘श्रीमान जी! क्या आप मुझे बता सकते हैं कि आप इस समय कहां जा रहे हैं।’ भेड़िये ने मगलू को रोककर पूछा।

मगलू ने जवाब दिया- ‘मैं किसी अक्लमंद आदमी की तलाश में जा रहा हूं, जो मुझे धनी होने का उपाय बता सके, जिससे कि मैं रातों-रात अमीर बन जाऊं।’

‘शायद वह अक्लमंद आदमी मेरी भी कुछ मदद कर दें।’ भेड़िये ने कहा-‘मैं पिछले दो सालों से अपने पेट के दर्द से परेशान हो रहा हूं। अगर वह अक्लमंद आदमी तुमको मिल जाए तो उससे यह भी पूछ लेना कि मेरे पेट का दर्द किस तरह ठीक हो सकता है।’

‘मैं जरूर पूछूंगा।’ मगलू बोला। उसके पश्चात मगलू तीन दिन और तीन रात बराबर चलता रहा। तब उसे एक सेब का पेड़ दिखाई दिया- ‘श्रीमान जी! आप कहां जा रहे है।’ सेब के पेड़ ने पूछा।

अरे सेब भाई, मैं किसी ऐसे अक्लमंद आदमी की तलाश में जा रहा हूं, जो मुझे एक दिन में अमीर बनने का उपाय बता सके। ताकि मैं रातों-रात अमीर बन जाऊं और लोग मुझे देखकर अचंभित हो जाए कि मैं इतना अमीर कैसे बन गया…  उसने बताया।

‘जिस आदमी की तलाश में तुम जा रहे हो, शायद वह अक्लमंद आदमी मेरी भी कुछ मदद कर सके।’ सेब के पेड़ ने कहा।

‘क्यों भाई, तुम्हें क्या कष्ट है?’

‘भाई, हर साल मेरी डालियों में फूल तो खिलते हैं लेकिन उसमें फल बनने से पहले ही वे मुरझाकर गिर जाते हैं। बुद्धिमान व्यक्ति से यह पूछना कि मुझमें फल कैसे लग सकते हैं।’

‘ठीक है सेब भाई, मैं जरूर पूछ लूंगा’ मगलू ने कहा।

फिर वह 3 दिन और 3 रात लगातार चलता रहा। तब वह एक झील के किनारे पहुंचा। वहां एक मछली ने पानी से बाहर अपना मुंह निकाला और मगलू को देखकर कहने लगी- ‘श्रीमान जी! आप कहां जा रहे हैं, क्या मुझे सकते हैं?

‘मैं किसी अक्लमंद आदमी की तलाश में जा रहा हूं, जो मुझे धनी होने का उपाय बता सके, ताकि मैं रातों-रात अमीर बन जाऊं और लोग हैरान हो जाएं।’

‘शायद वह अक्लमंद आदमी मेरी भी कुछ मदद कर सके। अगर वह तुम्हें मिल जाए तो मेरे बारे में भी पूछ लेना।’ मछली बोली।

‘क्यों, तुम्हें क्या कष्ट है?’

भाई साहब, पिछले 2 वर्षों से मैं अपने गले के दर्द से तड़प रही हूं। कृपया उन व्यक्ति से पूछना कि मैं कैसे ठीक हो सकती हूं। मछली ने अपनी परेशानी बतायी।

“ठीक है बहन, मैं उस व्यक्ति से तुम्हारे दुःख के बारे में जरूर पूछ लूंगा।’ मगलू ने कहा।

फिर वह 3 दिन और 3 रातें चलता रहा। अब की बार उसे एक बूढ़ा आदमी मिला।

‘बेटा मगलू, तुम्हें क्या परेशानी है? बताओ तुम क्या पूछना चाहते हो। उस बूढ़े आदमी ने मगलू से पूछा।

उसके इस प्रकार पूछने पर मगलू को बहुत हैरानी हुई।

मगलू ने पूछा- ‘आपको मेरा नाम कैसे मालूम हुआ?

‘मैं तुम्हें अच्छी प्रकार जानता हूं क्योंकि मैं वही अक्लमंद आदमी हूं जिसकी तुम्हें तलाश है और उसे तलाश करते हुए तुम यहां तक आए हो।’ बूढ़े ने कहा।

बूढ़े की बात सुनकर मगलू बहुत खुश हुआ उसने उसे बताया कि वह वहां क्यों आया था। उसने उसे भेड़िये, सेब के पेड़ और मछली के बारे में भी बताया।

‘मेरी एक बात ध्यान से सुनो।’ बुद्धिमान आदमी ने कहा- ‘उस मछली के गले में एक बहुत बड़ा मोती फंसा हुआ है। अगर वह मोती निकाल दिया जाए तो वह ठीक हो जाएगी।

‘जहां तक सेब के पेड़ की बात है उसके नीचे मिट्टी में सोने का एक कलश दबा हुआ है। उस कलश को निकाल देने से उस पर फल लगने शुरु हो जाएंगे।

और जहां तक भेड़िये का सवाल है तो अगर वह सबसे पहले मिलने वाले आलसी आदमी को मारकर खा जाए तो वह हमेशा के लिए इस दर्द से छुटकारा प्राप्त कर सकता है।

और श्रीमान जी, आपने मेरे लिए क्या उपाय सोचा है? मगलू ने पूछा।

‘जो तुम मुझसे चाहते थे वह तुम्हें मैं पहले ही दे चुका हूं।’ गुणी आदमी ने कहा- ‘अब तुम निश्चिंत होकर अपने घर जा सकते हो। जो तुम चाहते हो वो तुम्हें मिल जायेगा।’

यह सुनकर मगलू बहुत खुश हुआ, उसने बूढ़े आदमी का शुक्रिया अदा किया और घर की तरफ लौट पड़ा। जल्दी ही वह झील के किनारे पर पहुंच गया। तब मछली ने पूछा- ‘क्या अक्लमंद आदमी ने तुम्हें मेरे बारे में कुछ बताया है।’

‘हां…।’ मगलू ने कहा- ‘उन्होने बताया है कि तुम्हारे गले में एक मोती अटका हुआ है। अगर वह निकल जाए तो तुम ठीक हो जाओगी।’

“कृपया तुम उस मोती को निकाल दो।‘ मछली ने कहा- ‘वह मोती तुम ही रख लेना।’

वह बोला- मैं तुम्हारे लिए क्यों परेशान होऊं? ‘मैं तो बिना कुछ किए ही अमीर आदमी बनना चाहता हूं।’

तब वह आगे बढ़ा तो सेब का पेड़ मिला। ‘क्या बुद्धिमान व्यक्ति ने तुम्हें मेरे बारे में कुछ बताया है?’ उसने पूछा।

‘हां, बताया है।’ उसने कहा- ‘तुम्हारी, जड़ों के पास मिट्टी में एक सोने का कलश दबाया गया है। अगर उसे बाहर निकाल दिया जाए तो तुम ठीक हो जाओगे।’

सुनो भाई, तुम उस खजाने को निकाल दो और सारा सोना तुम ही रख लेना।’ पेड़ ने कहा।

“मैं तुम्हारी वजह से बिल्कुल परेशान नहीं हो सकता।’ वह बोला- ‘मैं तो बिना कुछ किए ही अमीर बनना चाहता हूं।’

तब वह आगे बढ़ा तो भेड़िया मिला। ‘क्या अक्लमंद व्यक्ति ने तुम्हें मेरे बारे में कुछ बताया ?’ भेड़िये ने प्रश्न किया।

‘हां, हां बताया है।’ मगलू ने कहा- ‘जो तुम्हें सबसे पहला आलसी मिले, तुम उसे खा जाओ। तुम हमेशा-हमेशा के लिए ठीक हो जाओगे।’

भेड़िया सुनकर बड़ा खुश हुआ। उसने मगलू से पूछा- ‘जरा मुझे यह तो बताओ कि तुमने रास्ते में क्या-क्या देखा, क्या- क्या सुना?”

मगलू ने उसे मछली और पेड़ के बारे में बता दिया। उसने कहा- ‘मैं उनके लिए भला क्यों परेशान होता? मैं तो बिना कुछ करे ही अमीर आदमी बनना चाहता हूं।’

भेड़िये को सारी बात सुनकर बड़ी हैरानी हुई। उसने मन-ही-मन सोचा – ‘इससे ज्यादा आलसी और कौन हो सकता है।’ इसलिए एक ही पल में भेड़िया उस पर टूट पड़ा और मारकर खा गया।’

कहानी की सीख (Moral of Story)

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि किसी को भी आलस नहीं करना चाहिए। क्योंकि आलस का परिणाम बहुत बुरा होता है। मगलू अपने आलसीपन के कारण ही अमीर आदमी नहीं बन पाया और भेड़िये का शिकार बन गया।

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