Information About Banyan Tree in Hindi | बरगद का पेड़

इस लेख में जानेंगे Information About Banyan Tree in Hindi, हिंदू धर्म में बरगद या वट वृक्ष को देव वृक्ष माना गया है। मान्यता के अनुसार बरगद के पेड़ में भगवान ब्रह्मा, विष्णु, और महेश निवास करते हैं। इसीलिए भारत में इस वृक्ष की पूजा की जाती है। और गाँवों में बरगद की छांव में लोग विश्राम करते हैं, और कई जगहों पर बैठक भी लगती है। क्योंकि इसकी छाया शीतल होती है।

Banyan Tree Meaning in Hindi

Information About Banyan Tree in Hindi | बरगद का पेड़
Information About Banyan Tree in Hindi | बरगद का पेड़

Banyan Tree भारत में पाए जाने वाला एक विशाल पेड़ है जिसे वट वृक्ष या बरगद का पेड़ कहते हैं। इसकी जड़े ऊपर की शाखाओं से भी निकलती है, और यह धीरे-धीरे बड़ी होकर जमीन तक चली जाती है। और जैसे-जैसे इसमें जड़े निकलती जाती है तो यह काफी मोटा दिखाई देने लगता है। और ऐसा लगता है कि कई सारे पेड़ एक ही जगह पर उग आएं हैं। भारत में बरगद के पेड़ की पूजा भी की जाती है।

About Banyan Tree in Hindi (बरगद का पेड़ की जानकारी)

बरगद का पेड़ एक विशाल और बड़ी शाखाओं वाला वृक्ष है। इसे भारत के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न नाम से जाना जाता है, जैसे हिन्दी में बरगद, वट वृक्ष या बरगट तो वही तमिल में अलम, गुजरात में वडलो, उर्दू में बर्गोडा बंगाली में बडगाछ और अंग्रेजी में Banyan Tree कहते है। बरगद का पेड़ भारत का राष्ट्रीय वृक्ष है।

👉 क्या आपको पता है सन 1950 में भारत सरकार ने बरगद के पेड़ को राष्ट्रीय वृक्ष घोषित किया था।

Banyan Tree लगभग भारत के सभी हिस्सों में पाया जाता है। और इस पेड़ की छाया बहुत ही ठंडी होती है। इसी कारण से गर्मी के दिनों में लोग इसकी छाया में बैठना बहुत ज्यादा पसंद करते है। बरगद का पेड़ भारत के अलावा इसके पड़ोसी देशों जैसे पाकिस्तान, बांग्लादेश, और म्यांमार के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में भी पाया जाता है।

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Information of Banyan Tree in Hindi

वैज्ञानिक वर्गीकरण

  • जगत: पादप
  • विभाग: Magnoliophyta
  • वर्ग: Magnoliopsida
  • गण: Urticales
  • कुल: Moraceae
  • वंश: Ficus
  • उपवंश: Urostigma

बरगद एक बहुवर्षीय विशाल वृक्ष है। इसे वट और बड़ के नाम से भी जानते हैं। और यह एक स्थलीय द्विबीजपत्री व सपुष्पक वृक्ष है। वट वृक्ष का तना सीधा और कठोर होता है। इसकी शाखाओं से जड़े निकलकर हवा में नीचे की ओर लटकती हैं और बढ़ते हुए जमीन के भीतर घुस जाती हैं एवं स्तंभ बनाती हैं। इन जड़ों को बरोह या प्राप जड़ कहा जाता हैं।

बरगद के पेड़ की ऊंचाई लगभग 20 से 25 मीटर या इससे भी अधिक हो सकती है। यह वृक्ष आमतौर पर दूसरे बड़े पेड़ो के ऊपर भी उग जाते है। बरगद की लकड़ी कठोर और मजबूत होती है। जिसका इस्तेमाल फर्नीचर या अन्य उपयोगी चीजें बनाने में किया जाता है।

बरगद का फल छोटा गोलाकार लाल रंग का होता है। जिसके अन्दर बहुत छोटे-छोटे बीज होते हैं। किन्तु इसका पेड़ बहुत विशाल हो जाता है। इसकी पत्ती लगभग अंडाकार व चौड़ी होती है। पत्तों की ऊपरी सतह चमकदार और नीचे का हिस्सा थोड़ा सा खुरदुरा टाइप का होता है। पत्तों की लम्बाई लगभग 5 से 7 इंच तक होती है। बरगद के पत्तों का शुरुआती रंग लाल होता है और जब पत्ता पूरा विकसित होता है तो यह हरा हो जाता है।

Banyan tree की पत्ती और फल
Banyan tree की पत्ती और फल

Banyan tree की पत्ती, शाखाओं या कलिकाओं को तोड़ने पर दूध जैसा रस निकलने लगता है जिसे लेटेक्स अम्ल कहा जाता है।

जब इसकी कुछ जड़े पेड़ से लटकर जमीन में घुस जाती है, तो पेड़ और भी तेजी से बड़ा होने लगता है। क्योंकि इसकी अन्य जड़े भी जमीन से पोषक तत्वों को सोखने लगती हैं।

बरगद के पेड़ का जीवन काल बहुत अधिक होता है यह लगभग 1000 साल या इससे भी अधिक वर्ष तक जीवित रहता है। इसकी लम्बी आयु का रहस्य इसकी जड़ो में छिपा है। बरगद के पेड़ों की उम्र सबसे ज्यादा होती है, इसलिए इसे ‘अक्षयवट’ भी कहा जाता है।

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इसके अलावा बरगद के पेड़ का धार्मिक महत्व भी बहुत ज्यादा है। जिस तरह से ब्रह्मा, विष्णु, महेश को त्रिमूर्ति माना जाता है, ठीक उसी तरह से बरगद,पीपल व बेलपत्र को भी महत्व दिया जाता है। और अनेक व्रत और त्योहारों पर वट वृक्ष को पूजा जाता है।

बरगद के पेड़ का विभिन्न नाम (Name of Banyan Tree Different Languages

LanguagesNames
Hindiबरगद, बट, बर, बरगट
EnglishBanyan, ईस्ट इण्डियन फिग ट्री
Punjabiबरगद (Bargad), बर (Bar)
Kannadaमरा (Mara), अल (Al), अला (Ala)
Bengaliबडगाछ (Badgach), बर (Bar), बोट (Bot)
Tamilअला (Ala), अलम (Alam)
Sanskritवट वृक्ष, न्यग्रोध, स्कन्धज, ध्रुव, क्षीरी, वैश्रवण, वैश्रवणालय, बहुपाद, रक्तफल, शृङ्गी, वास
Gujaratiवड (Vad), वडलो (Vadlo)
Marathiवड (Wad), वर (War)
Teluguर्री (Marri), वट वृक्षी (Vati)
Malayalamअला (Ala), पेरल (Peral)
Arabicतईन बनफलिस (Taein banfalis), जतुलेजईब्वा (Jhatulejaibva)
Urduबर्गोडा (Bargoda)
Oriyaबरो (Boro)
Konkaniवड (Vad)
Nepaliबर (Bar)
Persianदरखत्तेरेशा (Darakhteresha)
Bagheliबरा, बरगत, बरगद

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बरगद के पेड़ के फायदे (Benefits of Banyan Tree in Hindi)

धार्मिक महत्व होने के साथ ही बरगद का पेड़ औषधीय गुणों से भरपूर है। जिसके बारे में आगे पूरी जानकारी दी गई है। तो आइये जानते है बरगद के पेड़ के फायदे।

जोड़ों का दर्द में बरगद के फायदे

जोड़ो के दर्द पर कुछ शोध करने पर पता चला है कि शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से जोड़ो का दर्द होता है। बरगद के वृक्ष में ऐसे कई तत्व पाए जाते हैं, जो हमारे शरीर के लिए बहुत अधिक फायदेमंद साबित होता हैं। बरगद की पत्तियों में क्लोरोफॉर्म, ब्यूटेनॉल, और जल की मात्रा पायी जाती है। यह सभी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मददगार होते हैं। इसके साथ ही बरगद में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण भी पाया जाता है, जो की सूजन को कम करने में लाभदायक होता है।

त्वचा की फुंसियों में मददगार

त्वचा सम्बन्धी विकारों में बरगद की जड़ लाभदायक होती है। इसकी जड़ो में कई ऐसे गुण पाए जाते है, जो फुंसियों को ठीक करने में सहायक है।

दांतो और मसूड़ों को रखे स्वस्थ

बरगद के पेड़ का सभी भाग उपयोगी व गुणकारी होता है। इसके अंदर मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-माइक्रोबियल मुंह के अंदर होने वाले बैक्टीरिया को नष्ट करता है। बरगद की नरम जड़ को मंजन की तरह उपयोग करने से मुंह से जुड़ी कई समस्याएं दूर हो जाती है।

बालों को स्वस्थ रखने में मददगार है बरगद

जैसा की आपको ऊपर बताया गया है, की बरगद में एंटी-माइक्रोबियल गुण पाया जाता है। जो की बैक्टीरियल इन्फेक्शन को ख़त्म करने में मददगार होता है। बरगद की छाल और पेड़ की पत्तियों को एक साथ मिलकर लेप बना लें। इस लेप को बालों पर लगाने से बाल स्वस्थ हो जाता है।

बरगद के पेड़ के नुकसान

वैसे तो अभी तक बरगद के पेड़ का कोई भी नुकसान नहीं देखे गए हैं। किन्तु हमें इसका उपयोग करते समय एक नियंत्रित मात्रा का ही उपयोग करना चाहिए। और सबसे जरूरी बात की इसका उपयोग करने से पहले आपको विशेषज्ञ या आयुर्वेदिक डॉक्टर से जरूर परामर्श ले लेना चाहिए। ताकि किसी भी प्रकार के समस्या का सामना न करना पड़े।

सबसे पुराना बरगद का पेड़ कहां है

दुनिया में सबसे पुराना बरगद का पेड़ आचार्य जगदीश चंद्र बोस बॉटनिकल गार्डेन कोलकाता (भारत) में स्थित है। यह पेड़ दुनिया का सबसे बड़ा बरगद का पेड़ है, इसे 1787 में इस गार्डन में लगाया गया था। यह 14,500 वर्ग मीटर भूमि में फैला हुआ है और यह दुनिया का सबसे चौड़ा पेड़ है। इसकी ऊंचाई लगभग 22 से 24 मीटर है।

और यह पेड़ वर्तमान में इतना फैल चुका है, की इसकी जड़ो से एक बड़ा जंगल तैयार हो गया है। यदि आप इस बरगद के वृक्ष को देखे तो, आपको बिल्कुल भी नहीं लगेगा की यह एक ही पेड़ है।

इस वट वृक्ष से लगभग 4000 जड़े निकलकर जमीन को छू चुकी है। और इसी कारण से इस पेड़ को दुनिया का सबसे चौड़ा पेड़ भी माना जाता हैं। इस पेड़ पर 80 से ज्यादा प्रजात के पक्षियों का वास है।

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FAQs: बरगद के पेड़ के बारे में सवाल

Q: बरगद का पेड़ कैसा होता है?

Ans: बरगद का पेड़ बहुत बड़ा होता है। इसकी शाखाओं से बहुत सारी जड़े निकलकर हवा में झूलती रहती है। और कुछ समय बाद यह जमीन के अंदर घुस जाती है।

Q: क्या हम बरगद के फल को खा सकते हैं?

Ans: वैसे तो इसके अंदर किसी भी तरह का विष नहीं होता है। लेकिन इसे खाना मुश्किल होता है, क्योंकि इसका स्वाद बेहद अजीब सा होता है। इसकी पत्तियों का उपयोग खाना खाने वाली पत्तल बनाने के लिए किया जाता है।

Q: क्या पीपल और बरगद एक ही वृक्ष है?

Ans: बिल्कुल नहीं, हालांकि पीपल और बहगद दोनों वृक्ष Moraceae परिवार के है। लेकिन इनकी प्रजातियां अलग-अलग है। पीपल का वानस्पतिक नाम फिकस धर्मियोसा है, और बरगद का वानस्पतिक नाम फिकस बेंथालेंसिस है।

Q: बरगद के पेड़ पर किसका वास होता है?

Ans: हिंदू धर्म में बरगद को देव वृक्ष माना गया है। मान्यता के अनुसार बरगद के पेड़ में भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश निवास करते हैं।

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