समय का महत्व | Samay ka Mahatva essay in Hindi [Essay on Time]

Essay on Time. समय का महत्व (Samay ka Mahatva essay in Hindi) 1000 शब्दों में। आज के भाग दौड़ भरी जिंदगी में समय सबसे बड़ा बलवान है कब किसका समय बदल जाए कोई नहीं जानता है। सभी के पास एक दिन के 24 घंटे ही होता है। परन्तु समय के सदुपयोग से कोई सफल को हासिल कर सकता है। आज हम समय के महत्व पर एक निबंध शेयर कर रहे हैं। जो कि आपके परीक्षा के लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है।

समय का महत्व 10 लाइन (Samay ka Mahatva in Hindi 10 lines)

  1. समय सबसे बड़ा धन है एक बार हाथ से निकल जाने पर इसे किसी भी कीमत पर वापस नहीं पाया जा सकता।
  2. समय किसी के लिए नहीं रुकता है। हमें अपना काम समय पर ही पूरा करना चाहिए।
  3. समय का सदुपयोग करने वाले व्यक्ति को ही सफलता प्राप्त होती है।
  4. सफलता का वास्तविक रहस्य समय के सदुपयोग में ही छिपा हुआ है।
  5. आलस्य, स्वार्थीपन, बुरी संगति तथा काम टालना ये सब समय के शत्रु हैं।
  6. समय का सदुपयोग करने वाला व्यक्ति सदैव प्रसन्न रहता है।
  7. बचपन से ही हमें समय के मूल्य का ध्यान रखना चाहिए।
  8. समय के सदुपयोग का तात्पर्य है अपनी दिनचर्या नियमित रखना। समय से सोना, समय से उठना, भोजन, अध्ययन, भ्रमण, मनोरंजन, पूजन आदि का समय निश्चित करना।
  9. समय की बर्बादी हमें और हमारे भविष्य को भी बर्बाद करता है।
  10. यदि हमारे पास समय नहीं है, तो हमारे पास कुछ नहीं है।
समय का महत्व 10 लाइन (Samay ka Mahatva in Hindi 10 lines)
समय का महत्व 10 लाइन (Samay ka Mahatva in Hindi 10 lines)

समय का महत्व (Samay ka Mahatva essay in Hindi) 1000 शब्दों में।

इसके कुछ अन्य महत्वपूर्ण शीर्षक यह भी हैं यदि आप की परीक्षा में इनमें से कोई भी निबंध लिखने के लिए बोला जाए तो आप लिख सकते हैं।

समय बड़ा बलवान
अथवा
समय का सदुपयोग
अथवा
काल करे सो आज कर

समय का महत्व (Samay ka Mahatva essay in Hindi) 1000 शब्दों में।
समय का महत्व (Samay ka Mahatva essay in Hindi) 1000 शब्दों में।

[ विस्तृत रूपरेखा – (1) प्रस्तावना, (2) समय जीवन की सफलता का माप दण्ड, (3) समय के सदुपयोग से लाभ, (4) परिश्रम एवं तपस्या ही जीवन का मूल्यांकन है, (5) उपसंहार। ]

प्रस्तावना –

नष्ट हुई संपत्ति और खोए हुए वैभव को पुनः प्राप्त करने के लिए मनुष्य निरंतर मेहनत करता है। एक दिन उसे सफलता मिल जाती है। खोया हुआ स्वास्थ्य और नष्ट हुआ धन पुनः प्राप्त किया जा सकता है किंतु खोया हुआ जान फिर वापस नहीं आता। समय ना तो मनुष्य की प्रतीक्षा करता है और ना परवाह। समय का रथ जो तेजी से चल रहा है उसे कोई भी रोक नहीं सकता। इसलिए कहा है :

“क्षणश: कणशश्चैव विद्यामर्थं च साधयेत्।
क्षणे नष्टे कुतो विद्या, कणे नष्टे कुतो धनम्।।”

प्रत्येक क्षण में विद्या (ज्ञान) प्राप्त करो और कण-कण जोड़कर धन पाओ। क्षण भर का समय नष्ट हो जाए तो विद्या कहाँ और कण नष्ट हो जाए तो धन नहीं। तुलसीदास जी ने भी कहा है :

“दिवस जात नहीं लागत बारा”

दिन गुजरते देर नहीं लगती। जो समय पर जाग नहीं सका, वही व्यक्ति पीछे रह जाता है। नदी बहती है, घड़ी चलती है, सूरज, चाँद तथा तारे भी विश्राम नहीं करते तो फिर हम क्यों आराम करें। समय को व्यर्थ न गँवायें, उसका सदुपयोग करें। विद्वान लोगों का समय अच्छे शास्त्रादि को पढ़ने में व्यतीत होता है लेकिन मूर्खों का समय बुरे व्यसनों, लड़ाई-झगड़ों तथा निद्रा आदि में ही व्यतीत होता है।

“काव्यशास्त्र विनोदेन कालः गच्छति धीमताम् व्यसनेन च मूर्खाणां निद्रया कलहेन वा।”

समय जीवन की सफलता का माप दण्ड

जीवन की सफलता का रहस्य समय के सही उपयोग में निहित है। संसार के सभी प्राणियों का समय पर समान रूप से अधिकार है। समय की उपयोगिता साधारण से साधारण व्यक्ति को भी महान् बनाती है। महापुरुषों के चरित्र से हमें प्रेरणा मिलती है। उन्होंने एक-एक क्षण का उपयोग किया तभी जीवन में उन्हें सफलता मिली। हमें प्रातः जल्दी उठकर दिन भर के कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार कर लेनी चाहिए और आज के कार्यों को आज ही पूरा कर लेना चाहिए। जो व्यक्ति निश्चित उद्देश्य को सामने रखता है उसे अपना रास्ता स्पष्ट दिखायी देता है। वह उलझन में नहीं रहता और पूर्ण मनोयोग से उस कार्य की ओर बढ़ता है।

समय के महत्व को समझने वाला दुःखी नहीं होता। समय के सदुपयोग का तात्पर्य है नियमित होना। जो अपनी दिनचर्या नियमित रखते हैं वे ही कुछ कर पाते हैं। समय से सोना, समय से उठना, भोजन, अध्ययन, भ्रमण, मनोरंजन, पूजन आदि का समय निश्चित करें। अपने बुजुर्गों के पास बैठें, उनकी सेवा करें। जो व्यक्ति काम टालने वाले होते हैं वे सदैव पछताते हैं। कबीर दासजी ने कहा है

“काल करै सो आज कर, आज करै सो अब ।
पल में परलय होयगी, बहुरि करैगो कब ॥ “

समय के सदुपयोग से लाभ-

समय के सदुपयोग से व्यक्ति की उन्नति होती है, अतः बचपन से ही हमें समय के मूल्य का ध्यान रखना चाहिए। शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नियमित होना आवश्यक है और अपने मानसिक स्वास्थ्य के लिए हमें अपने खाली समय में स्वाध्याय हेतु अच्छे-अच्छे ग्रन्थों को पढ़ना चाहिए। अपने से अधिक बुद्धिमान लोगों से चर्चा करनी चाहिए। कभी किसी काम को देर से शुरू न करें, क्योंकि प्रारम्भ की देरी से बाद में भी विलंब हो जाता है और फिर उसके बाद के अन्य कामों की सब व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो जाती है। पल के अंश में क्या हो जायेगा क्या पता ? कहा गया है –

“का जाने होइ है पल के चौथे भाग।”

अतः हर पल का उपयोग करें।

परिश्रम एवं तपस्या ही जीवन का मूल्यांकन है-

देश और समाज के प्रति भी हमारा कर्तव्य है। हमें सेवा, परोपकार हेतु भी समय निश्चित रखना चाहिए जिससे देश और समाज की भी उन्नति हो । वर्तमान में विज्ञान का युग होने से हमारी दैनिक जिन्दगी में समय की बचत होने लगी है। यात्रा, लेखन कार्य, भोजन सभी क्षेत्रों में समय बचने लगा है। घण्टों का काम मिनटों में संपन्न हो जाता है। समय का सदुपयोग करने वाला व्यक्ति सदैव प्रसन्न रहता है। उसे चिन्ता नहीं रहती कि उसका कोई काम अधूरा है। थोड़े समय में वह अधिकाधिक काम कर लेता है। जो लोग बेकार बैठे रहते हैं, वे समाज में परेशानी पैदा करते हैं, जैसे उन्हें यदि पैसों ण भर की जरूरत है तो वे काम न करके जेब काटेंगे या चोरी करेंगे। जिसके पास समय की कीमत है वह व्यर्थ की बातों में समय न गँवाकर काम करके पैसा कमाता है और अपनी आवश्यकता पूरी करता है। ऐसे व्यक्ति का सभी आदर करते हैं। समय का सदुपयोग करने वाला व्यक्ति जीवन में उन्नति करता है क्योंकि परिश्रम और तपस्या से ही किसी व्यक्ति का मूल्यांकन किया जाता है कि वह अपना समय कैसे बिताता है। सत्पुरुष स्वयं सद् मार्ग पर चलकर दूसरों को भी समय बचाने की प्रेरणा देते हैं ताकि चूक जाने पर पछताना न पड़े।

भारत में जीवन के समय को चार भागों में बाँटा गया है और उस समय नियत कार्य समय का सदुपयोग है।

“प्रथमे नार्जिते विद्या, द्वितीये नार्जिते धनं ।
तृतीय नार्जिते पुण्यं, चतुर्थ किम करिष्यति?”

अर्थात् जीवन के प्रथम भाग में यदि विद्या का अध्ययन नही किया, द्वितीय भाग में धन नहीं कमाया और प्रौढ़ावस्था में परोपकार या पालन-पोषण कर के कोई पुण्य नहीं कमाया तो जीवन के आखिरी चरण में क्या कर लोगे ?

उपसंहार –

हमें हमेशा समय का सदुपयोग करना चाहिए तथा उन लोगों से बचना चाहिए जो समय के शत्रु हैं। आलस्य, स्वार्थीपन, बुरी संगति तथा काम टालना ये सब समय के शत्रु हैं। इन्हें पास भी नहीं भटकने देना चाहिए।

“आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महारिपु ।”

अर्थात् आलस्य ही मनुष्य के शरीर का सबसे बड़ा शत्रु है । व्यर्थ की गपशप, घण्टों तक मोबाइल चलाना, लड़ाई-झगड़ा या सोते रहना ये सब समय का दुरुपयोग है। जब प्रकृति, पशु-पक्षी सब में समय की नियमितता है तो हम तो मनुष्य हैं। अतः आज से ही समय का सदुपयोग करें, यही सफलता की कुंजी है। सफलता का वास्तविक रहस्य समय के सदुपयोग में ही निहित है।

-: The End :-

यह निबंध समय के महत्व के बारे में है। जिसका शीर्षक इस प्रकार से है Essay on Time. अथवा समय का महत्व अथवा समय का सदुपयोग या समय बड़ा बलवान। यह निबंध आपके लिए बहुत उपयोगी है अतः आपको (Samay ka Mahatva essay in Hindi) 1000 शब्दों में लिखना जरूर से आना चाहिए।

इसी प्रकार के और भी उपयोगी, ज्ञानवर्धक और मनोरंजक जानकारी हिंदी में पढ़ने के लिए Hindi Read Duniya को सबस्क्राइब जरूर करें। निबंध को पूरा पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद!

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FAQ Samay ka Mahatva

Q: विद्वान और मूर्ख का समय कैसे व्यतीत होता है?

Ans: विद्वान लोगों का समय अच्छे शास्त्रादि को पढ़ने में व्यतीत होता है। लेकिन मूर्खों का समय बुरे व्यसनों, लड़ाई-झगड़ों तथा निद्रा आदि में ही व्यतीत हो जाता है।

Q: विद्यार्थी जीवन में समय का महत्व

Ans: विद्यार्थी जीवन में समय का बहुत बड़ा महत्व है, जो विद्यार्थी समय का सही उपयोग करता है तो उसे जीवन में सफलता अवश्य प्राप्त होती है।

Q: समय का दुरुपयोग से हानि

Ans: समय का दुरुपयोग करने से जीवन में निराशा, असफलता, असंतोष और हानि ही हाथ लगती है।

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