पाचन तंत्र के प्रमुख अंगों के नाम | Manav Pachan Tantra ke Bhago ke Naam

पाचन तंत्र के प्रमुख अंगों के नाम, Manav Pachan Tantra ke Bhago ke naam, पाचन क्या है?

हम जो भी भोजन ग्रहण करते हैं उनमें विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं। पोषक का उपयोग जीवों में अपने शरीर की वृद्धि (Growth), प्रतिपूर्ति (Repairing), एवं विकास (Development), आदि के लिए किया जाता है। पोषक में रासायनिक यौगिकों के निश्चित समूह; जैसे- प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन तथा खनिज लवण आदि शामिल होते हैं। जो कि विभिन्न भोज्य पदार्थों में अलग-अलग मात्रा में पाए जाते हैं। लेकिन जो हम भोजन करते हैं उसके अणुओं का आकार इतना बड़ा होता है कि कोशिकाएँ उनका उपयोग नहीं कर सकतीं। अतः इसके लिए पाचन तंत्र होता है।

पाचन क्या है? What is digestion system?

पाचन का शाब्दिक अर्थ होता है, टुकड़े-टुकड़े करना। इसका मतलब यह है कि कार्बनिक भोजन को अवशोषण हेतु यान्त्रिक तथा रासायनिक प्रक्रिया द्वारा छोटी इकाइयों में खण्डित करना।

भोजन के पाचन की प्रक्रिया काफी लम्बी होती है यह मुंह से शुरु होती है और बड़ी आँत तक होते हुए बचे हुए अपशिष्ट को गुदा के जरिए शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।

पाचन तंत्र के प्रमुख अंगों के नाम – Manav Pachan Tantra ke Bhago ke Naam

मानव पाचन तंत्र के प्रमुख अंग कौन कौन से हैं (Manav pachan tantra ke pramukh ang kaun kaun se hain) नीचे दिया जा रहा है-

  1. मुख (Mouth) 
  2. ग्रसनी (Pharynx) 
  3. ग्रासनली (Oesophagus) 
  4. आमाशय (Stomuch) 
  5. छोटी ऑत (Small Intestine)
  6. बड़ी ऑत (Large Intesine)
  7. मलाशय (Rectum)
  8. गुदा (Anus) 

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ये हैं मानव पाचन तंत्र के प्रमुख 8 अंग जो भोजन को पचाने में मदद करते हैं। आइए अब इनके बारे में विस्तार से समझते हैं।

पाचन क्रिया में भाग लेने वाले सभी अंग – Digestive system organs in Hindi

पाचन तंत्र के प्रमुख अंगों के नाम | Manav Pachan Tantra ke Bhago ke Naam
पाचन तंत्र के प्रमुख अंगों के नाम – Manav Pachan Tantra ke Bhago ke Naam

मुख (Mouth)

मुख पाचन तंत्र का प्रमुख अंग होता है। पाचन का सबसे बड़ा काम मुंह ही करता है, दांतो द्वारा भोजन को छोटे-छोटे टुकड़ो में तोड़ दिया जाता है। मुंह को दो भागो में बाँटा गया है, पहला भाग मुख गुहा (Buccal Cavity) जो बाह्य रूप से होंठ गाल तथा अन्दर से दॉत तथा मसूड़ो में विभक्त रहता है। दूसरा भाग दॉत व मसूड़ो से पीछे की ओर ग्रसनी में खुलता है।

मुंह का भीतरी भाग श्लेश्मिक झिल्लियों द्वारा निर्मित होता है। यह भी त्वचा जैसी ही होती है, तथा इसका रंग लालिमा रहता है। इसमें रसस्त्रावी ग्रन्थियॉ (Secreting glands) होती हैं और इसमें पास आने वाले पदार्थ का शोषण करने की क्षमता भी रहती है।

ग्रसनी (Pharynx)

मुख गुहा पश्चभाग की ओर जहॉ खुलता है वह भाग ग्रसनी कहलाता है। ग्रसनी से श्वास तथा भोजन का मार्ग शुरू होता है। श्वास प्रणाली के मार्ग को वायु-नली (Trachea) तथा भोजन के मार्ग को ग्रासनली (Oesophagus) कहते है। हम जो भी भोजन चबाते है वह ग्रसनी के द्वारा ही ग्रासनली मे पहुँचता है, और सांस फेफड़ो तक जाता है। इसकी लम्बाई 4 से 6 इंच तक होती है। ग्रसनी के मुख्य रूप से 3 भाग होते हैं।

1. नासाग्रसनी (Nasopharynx) – ग्रसनी के इस भाग में ऊपर की तरफ अन्तः नासाद्वार (Internal nares) खुलते हैं।

2. मुख ग्रसनी (Oropharynx) – मुखगुहिका गलद्वार द्वारा ग्रसनी के जिस भाग में खुलती है उसे मुखग्रसनी कहा जाता है।

कण्ठग्रसनी (Laryngopharynx) – ग्रसनी के पश्चभाग को कण्ठग्रसनी कहते हैं। इसमे दो छिद्र होते हैं अगले छिद्र को कणंठद्वार (Glottis) तथा पिछले छिद्र को निगलद्वार (Gullet) कहते हैं। कण्ठद्वार श्वासनली (Trachea) में खुलता है व निगलद्वार ग्रासनली में खुलता है जो सामान्यतः बंद रहता है।

ग्रासनली (Oesophagus)

अमाशय में भोजन जिस नली के द्वारा पहुँचता है, उसे ग्रासनली कहते हैं। यह एक सकरी, पेशीय, 25 सेमी लम्बी, नलाकार रचना होती है। ग्रासनली सर्वाइकल क्षेत्र के 6 वें कशेरूक से शुरू होती है और नीचे की ओर होती हुई थोरेसिक क्षेत्र के 10 वें कशेरूक तक होती है। ग्रासनली की भित्ति की निम्न परतें होती है।

  1. श्लेश्मिक कला (Mucosa)
  2. अवश्लेश्मिक परत (Submucosa)
  3. पेशीय परत (Muscularis Externaa)

ग्रासनली गले (pharynx) से आरम्भ होती है। और अमाशम मे खुलती है। यह मॉशपेशियॉ तथा झिल्लियों से बनी होती है।

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आमाशय (Stomach)

अमाशय मोटी, पेशीय दीवारों वली, J के आकार की थैलेनुमा प्रसार्य (Distensible) संरचना होती है। यह बाईं ओर के उदरीय गुहा के ऊपरी भाग में स्थित होता है। इसकी लंबाई 30 सेमी होती है। आमाशय पाचन संस्थान का सबसे चौड़ा भाग है इसका एक भाग ग्रासनली तथा एक भाग छोटी ऑत के पहले भाग ग्रहणी पर खुलता है।

अमाशय न केवल भोजन को संग्रहीत करता है अपितु भोजन का यान्त्रिक एवं रासायनिक पाचन करता है। अमाशय को 3 भागों में विभाजित किया गया है-

  • Cardiac part
  • Fundic part
  • Pyloric part

कार्डियक भाग (Cardiac part) क्या है?

ग्रासनली कार्डियक छिद्र द्वारा अमाशय के जिस भाग पर खुलती है उसको कार्डियक आमाशय कहा जाता है। Cardiac छिद्र एक कार्डियक अवरोधिनी से युक्त होता है जो भोजन को वापस ग्रासनली में नहीं जाने देता है।

फन्डिक भाग (Fundic part) क्या है?

आमाशय के केन्द्रीय भाग को फन्डिक आमाशय या फन्डस (Fundus) कहा जाता है।

पाइलोरिक भाग (Pyloric part) क्या है?

आमाशय के निचले संकरे भाग को पाइलोरिक आमाशय (Pyloric Stomach) कहते हैं। यह भाग पाइलोरिक छिद्र द्वारा ग्रहणी (Duodenum) में खुलता है। पाइलोरिक छिद्र में एक अवरोधिनी होता है जो भोजन को ग्रहणी से वापस अमाशय में आने से रोकती है।

आमाशम में पाचक रस का स्त्राव होता है जो भोजन को पचाने का कार्य करत है। आमाशय 24 घंटे में लगभग 5-6 लीटर रस निकालता है। इसमें भोजन प्राय: 4 घंटे तक रहता है तथा इसमें लगभग 1.5 किलोग्राम भोजन समा सकता है। परन्तु कई लोगों में इसकी क्षमता बहुत अधिक पायी जाती है।

छोटी आँत (Small Intestine)

आमाशाय के बाद के आहार नाल के शेष भाग को आँत (intestine) कहते हैं। यह लगभग 25 फिट लम्बी होती है तथा आँत के दो भाग होते हैं छोटी आँत और बड़ी आँत।

छोटी आँत लगभग 20 फीट लम्बी अतिकुण्डलित नलिका समान रचना होती है जो बड़ी आँत से ढकी रहती है। यह 3 भागों में बटी रहती है

  • ग्रहणी (Duodenum) 25 सेमी लम्बा व अपेक्षाकृत मोटा होता है।
  • मध्यान्त्र (Jejunum) 8 फीट लम्बी होती है।
  • शेषान्त्र (Ileum) 12 फीट लम्बी होती है।

शेषान्त्र उदरगुहा के निचले भाग में सीकम में खुलती है। शेषान्त्र और सीकम के बीच में इलियो-सीकल कपाट होते हैं जो भोजन को सीकम से शेषान्त्र में वापस आने से रोकते हैं।

बड़ी आँत (Large Intestine)

छोटी आँत के बाद बड़ी आती है इसकी लम्बाई लगभग 5 फीट होती है और यह छोटी आँत से मोटी होती है। इसके 3 भाग होते हैं-

  • सीकम (Caecum),
  • वृहदान्त्र (Colon),
  • मलाशय (Rectum)

छोटी ऑत की तरह ही बड़ी आँत में भी कृमिवत् आकुंचन होता रहता है। इस गति के कारण छोटी आँत से आये हुए आहार रस (Chyme) के जल भाग का शोषण होता है। छोटी आँत से बचा हुआ आहार रस जब बड़ी आँत में आता है, तब उसमें 95 प्रतिशत जल रहता है।

इसके अतिरिक्त कुछ भाग प्रोटीन , कार्बोहाइड्रेट तथा वसा का भी होता है। बड़ी आँत में इन सबका ऑक्सीकरण होता है तथा जल के बहुत बड़े भाग को सोख लिया जाता है। अनुमानत: 24 घण्टे में बड़ी आँत में 400 C.C पानी का शोषण किया जाता है। यहाँ से भोजन रस का जलीय भाग रक्त में चला जाता है तथा गाढ़ा भाग विजातीय द्रव्य के रूप में मलाशय में होता हुआ मलद्वार से बाहर निकल जाता है।

मलाशय (Rectum)

मलाशय बड़ी आँत के सबसे नीचे थोड़ा फैला हुआ लगभग 15 से 20 सेमी लम्बा होता है। इसकी पेशीय परत मोटी होती है। मलाशय के म्यूकोशा में शिराओं का एक जाल होता है जब ये फुल जाती है तो इनमें से रक्त निकलने लगता है जिसे अर्श या बवासीर कहा जाता है।

गुदा (Anus)

गुदा (Anus) पाचन तंत्र का अन्तिम भाग है। इसी भाग से मल का निष्कासन होता है। गुदीय नली श्लैशिक परत एक प्रकार के शल्की उपकला की बनी होती है जो ऊपर की ओर मलाशय की म्यूकोसा में विलीन हो जाती है।

पाचन तंत्र के सहायक अंग कौन कौन से हैं?

  1. दाँत (Tooth)
  2. जिव्हा (Tongue)
  3. गाल (Cheek)
  4. लार ग्रन्थियाँ (Salivary Glands)
  5. अग्न्याशय (Pancreas)
  6. यकृत (Liver)

FAQ Manav Pachan Tantra

Q: भोजन के पाचन की प्रक्रिया कितने चरणों में सम्पन्न होती है?

A: आहार नाल में भजन के पाचन की प्रक्रिया 5 चरणों में पूरा होती है-

अन्तर्ग्रहण (Ingestion),
पाचन (Digestion),
अवशोषण (Absorption),
स्वांगीकरण (Assimilation),
मलत्याग (Egestion) ।

Q: पाचन तंत्र का सबसे लंबा अंग कौन है?

A: पाचन तंत्र का सबसे लंबा अंग छोटी आंत है। छोटी आँत की लंबाई 20 फीट होती है।

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2 thoughts on “पाचन तंत्र के प्रमुख अंगों के नाम | Manav Pachan Tantra ke Bhago ke Naam”

  1. बहुत अच्छी जानकारी आपने शेयर की हैं, इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद!

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